वर्तमान की यह यात्रा
मुक्ति यात्रा की कोई कड़ी है ही
गुरु का ज्ञान इस यात्रा को उददेश्य दे जाता है
और चल पड़ता है प्राणी का अचेतन
चेतन होने को सचेतन के साथ
स्वप्नों की संरचना को छोड़
जान लेता है जीवन की क्षण भंगुरता को
कहाँ हो पाएंगे ये दिवास्वपन
पूरे हो भी जाएँ
तो क्या सदा साथ रहेंगे तुम्हारे ?

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