रविवार, 1 अप्रैल 2012



     मौन 



संध्या के क्षितिज पर 

मौन  का चाँद  उगा 

भीतर के आकाश में 

ध्यान की गहराई में 

मन की शांत झील में 

प्रतिबिंबित होता हुआ 

झील की हलचल से अनछुआ 

न चाँद  भीगा झील में 

न कम्पित हुई झील 

पूर्णिमा का चाँद 

मौन के भीतर के आकाश में 
                               नीरजा 

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर!!!!

    आपका स्वागत है bloggers world में....

    ढेरों शुभकामनाएँ....
    अनु

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