मौन
संध्या के क्षितिज पर
मौन का चाँद उगा
भीतर के आकाश में
ध्यान की गहराई में
मन की शांत झील में
प्रतिबिंबित होता हुआ
झील की हलचल से अनछुआ
न चाँद भीगा झील में
न कम्पित हुई झील
पूर्णिमा का चाँद
मौन के भीतर के आकाश में
नीरजा
बहुत सुन्दर!!!!
जवाब देंहटाएंआपका स्वागत है bloggers world में....
ढेरों शुभकामनाएँ....
अनु