गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

अतीत जो कभी वर्तमान  हुआ करता था 
न अजर है न अमर है
बस यादें ही शेष हैं 
यादें  भी  अमर कहाँ 
खत्म हो जाएँगी 
काल के रूप से 
तन के संग साथ ही ,
अमर तो कुछ भी नहीं 
तब कालजई कौन हुआ ?
खुद काल भी तो कालजयी न हुआ 
आज जो वर्तमान है 
कल वो अतीत बन के 
अँधेरे के गर्त में खो जायेंगा 
अतीत जो कभी वर्तमान हुआ करता था !!!!!!!!                            नीरजा  

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