अंतर्चेतना
सोमवार, 2 अप्रैल 2012
अहसास
रात आती है
तन्हाई छा जाती है
दूर कहीं टिमटिमाती लौ
किसी के जगे होने का
अहसास दिला जाती है
1 टिप्पणी:
ANULATA RAJ NAIR
3 अप्रैल 2012 को 1:14 am बजे
beautiful.....
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beautiful.....
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