उम्र कर दी फ़नाह्
उम्र कर दी फ़नाह्
इस जहान में हमने
आज कहते हो
कि किया क्या है !
ढोते रहे सर्द रिश्तो को
ता उम्र हम
आज कहते हो तुम
हुआ क्या है !!
दिये है ज़ख्म अपनो ने हमे
पूछ्ते हो कि फ़िर् खता क्या है !!
कैद हो गये अपनी खमोशी की जंजीरों में हम
अब पूछ्ते हो कि ये सज़ा क्या है !!!
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