मंगलवार, 3 अप्रैल 2012


उम्र कर दी फ़नाह्

उम्र  कर दी फ़नाह् 

इस जहान में हमने 

आज  कहते हो 

कि किया क्या है !

ढोते रहे सर्द रिश्तो को 

ता उम्र हम 

आज कहते हो तुम 

हुआ क्या है !!

दिये है ज़ख्म अपनो ने हमे 

पूछ्ते हो कि फ़िर् खता क्या है !!

कैद हो गये अपनी खमोशी की जंजीरों में हम
 
अब पूछ्ते हो कि ये सज़ा क्या है !!! 

  •  नीरजा 

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